नियति ने बदली किसान की किस्मत, आलू की खेती से कमा रहे विदेश जैसी कमाई
फरीदकोट के बोहर सिंह गिल ने पुश्तैनी खेती अपनाकर 250 एकड़ में आलू की खेती से करोड़ों की कमाई की और 250 लोगों को रोजगार दिया। जानिए उनकी प्रेरणादायक कहानी।
"फरीदकोट के बोहर सिंह गिल ने पुश्तैनी खेती को अपनाकर आलू में बनाई करोड़ों की आमदनी और स्थानीय लोगों को दिया रोजगार।"
नियति ने दिखाई नई राह
कहते हैं कि हर चीज इंसान के वश में नहीं होती, कुछ नियति पर निर्भर करती है। ऐसा ही कुछ हुआ पंजाब के फरीदकोट के रहने वाले बोहर सिंह गिल के साथ। उनका सपना था कि वह विदेश जाकर डॉलर में कमाई करेंगे, लेकिन नियति ने उन्हें खेती की राह दिखाई।
उन्होंने अपने परिवारिक खेती को अपनाया और अब वे 250 एकड़ में आलू की खेती कर विदेशों जैसी आमदनी कमा रहे हैं। उनका कहना है कि हर एकड़ से लगभग 1 लाख रुपये का मुनाफा होता है। सालाना उनकी कुल आमदनी लगभग 2.5 करोड़ रुपये है। इसके अलावा, वे हर साल 250 लोगों को 3-4 महीने के लिए अस्थाई रोजगार और लगभग 20 लोगों को स्थायी रोजगार देते हैं।
खेती की शुरुआत और विस्तार
बोहर सिंह ने अपने सफर की शुरुआत अपनी पुश्तैनी जमीन 37 एकड़ से की। धीरे-धीरे खेती का विस्तार हुआ और उन्होंने 200 एकड़ जमीन पट्टे पर लेकर इसे बढ़ाया। शुरू में उन्होंने गेहूं और धान की खेती की, लेकिन बाद में उन्होंने आलू की खेती को अपनाया, जो अब 250 एकड़ में फैली है।
नई तकनीक से सिंचाई में बचत
पानी की कमी को पूरा करने के लिए बोहर सिंह ने स्प्रिंकलर सिस्टम लगाया। इससे आलू की खेती में 50% तक पानी की बचत हुई और उत्पादन भी बढ़ा। वर्तमान में 150 एकड़ में स्प्रिंकलर सिस्टम लगाया गया है और जल्द ही इसे पूरे खेतों में लागू किया जाएगा।
सरकारी सब्सिडी बनी सहारा
सिंचाई के खर्च को कम करने में सरकारी सब्सिडी भी मददगार साबित हुई। स्प्रिंकलर सिस्टम पर पुरुष किसानों को 80% और महिला किसानों को 90% तक सब्सिडी मिलती है। सब्सिडी के बाद खर्च मात्र ₹15,000 प्रति एकड़ आता है। बोहर सिंह अन्य किसानों को भी इसके लाभ उठाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
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