लाल गन्ने की मिठास कर रही मालामाल
जी तोड़ मेहनत कर धान,गेहूं, दलहन,तिलहन के साथ सब्जियों का उत्पादन करने वाला किसान वर्तमान में लाल गन्ने की खेती की ओर तेजी से आकर्षित हुआ है। नतीजा यह है कि मेहनत की बदौलत किसानों को लाल गन्ने की मिठास मालामाल कर रही है। यद्यपि यह गन्ना उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर होता है परन्तु अंबेडकर नगर जिले में होने लाल गन्ने के स्वाद में कुछ और ही बात है। यही कारण है कि यहां के गन्ने की मांग उत्तर प्रदेश के तमाम जनपदों के साथ बिहार एवं अन्य राज्यों में भी है।
इस गन्ने के उत्पादन के लिए अंबेडकरनगर के पूर्वी हिस्से में स्थित सिद्ध स्थली गोविंद साहब के निकटवर्ती दर्जनों गांव की मिट्टी सर्वाधिक उपयुक्त है। सम्भवतः यही वजह है कि यहां के किसानों के लिए लालगन्ने की खेती मुनाफे का सौदा साबित हो रही है। अत्यंत मुलायम और मीठा होने के नाते इसे लोग चूसने के लिए काफी पसंद करते हैं। एकादशी से लेकर गोविंद साहब मेला भर इस गन्ने की तूती बोलती है। इलाके के किसान गोविंद साहब मेले में लाल गन्ने की बिक्री करके सामान्य गन्ना की तुलना में कई गुना अधिक लाभ कमाते हैं। इसलिए अन्य फसलों की बुवाई में भले ही पिछड़ जाएं मगर लाल गन्ने की फसल समय से उगाने में ये जी जान लगा देते हैं।
एक अनुमान के मुताबिक हर साल गोविंद साहब मेले में करीब 15 से 20 हजार कुंतल लाल गन्ने की बिक्री होती हैं। मेले में गन्ना बेचने पर किसानों को अच्छे और नकद मूल्य मिलते है। मेले के बाद आसपास की बाजारों में गन्ने की काफी मांग की जाती है जो यहीं नहीं थमथमती। पूर्वी उत्तर प्रदेश के तमाम जनपदों के साथ-साथ बिहार में भी यहां के गन्ने पसंद किए जाते हैं। बाहर के व्यापारी आकर खेत से ही खड़ी फसल खरीद लेते हैं और दूरदराज ले जाकर बेचते हैं। एक खास बात और कि गोविंद साहब मेले में आने वाले लाखों बाहरी श्रद्धालु इसे प्रसाद के तौर पर ले जाते हैं। इस नाते भी किसानों को अच्छा मूल्य मिलता है।
इन गांवों में होती है खेती...
गोविंद साहब मेला क्षेत्र के निकटवर्ती गांव भगवानपुर मंझरिया, इमादपुर,अमोला,रुस्तमपुर,शाहपुर, महमूदपुर, कौड़ाही,आमादरवेशपुर, अमड़ी लोहरा,पाभीपुर, कोरझा, करीमनगर,भोजपुर नसीरपुर गांव के साथ किछौछा के आसपास के तमाम गांवों में इसका खूब उत्पादन होता है। यहां के किसान इसका बीज भी बेचते हैं। जिसकी बुवाई मार्च से लेकर मई के महीने में होती है।
किसानों का कहना है...
यहा के मेहनत-कश छोटे और मंझोले किसानों की आय का प्रमुख स्रोत बने लाल गन्ना के उत्पादक किसानों में राजेश कुमार, संतराम, लालजीत, मंसाराम यादव, राम पूजन निषाद, रणविजय आदि का कहना है कि चीनी मिल से पर्ची की समस्या और देर से भुगतान के चलते देसी गन्ने से मोहभंग होने के बाद लाल गन्ना संजीवनी बन गया है।
किसानों के लिए ध्यान देने की प्रमुख बातें..
कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि इस लाल गन्ने की खेती जिन बातों पर खास ध्यान देने की जरूरत है वे निम्नवत हैं-
जलवायु- लाल गन्ने के लिए 20 से35 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे अच्छा होता है। बुवाई के समय 20 से 30 डिग्री और कटाई के समय 20-25 डिग्री तापमान आदर्श माना जाता है।
मिट्टी- इस फसल के लिए अच्छी जल निकासी वाली और दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त है। रेतीली, चिकनी या भारी चिकनी मिट्टी में भी उगाया जा सकता है, बशर्ते पानी निकलने और हवा के संचार की व्यवस्था हो।
खेत की तैयारी- बुआई से पूर्व खेत की कम से कम दो बार गहरी जुताई करके मिट्टी के ढेलों को तोड़कर खेत को समतल करना चाहिए।
बीज की मात्रा और बुआई- बीज की मात्रा उसकी किस्म और कलियों की संख्या पर निर्भर करता है।इसकी बुवाई फरवरी मार्च बेहतर होता है। क्योंकि यह मौसम अंकुरण के लिए बेहतर होता है। बुवाई से पहले बीजों को किसी फफूंदनाशक से उपचारित कर लेना चाहिए।
सिंचाई- मिट्टी में पर्याप्त नमी बनाए रखने के लिए समय-समय पर सिंचाई करते रहना चाहिए।खरपतवार नियंत्रण के लिए नियमित रूप से निराई-गुड़ाई जरूरी है।
- डॉ घनश्याम भारतीय
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