आम के पेड़ों की सही देखभाल से होगी बंपर पैदावार, बढ़ेगी किसानों की आय, जानने के लिए पढ़े पूरी खबर..

Mango Cultivation Tips: जनवरी में आम के पेड़ों की सही देखभाल से होगी बंपर पैदावार। संतुलित सिंचाई, खाद और रोग प्रबंधन से बाग होंगे फलों से लदे और किसानों की आय बढ़ेगी।

Jan 12, 2026 - 09:17
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आम के पेड़ों की सही देखभाल से होगी बंपर पैदावार, बढ़ेगी किसानों की आय, जानने के लिए पढ़े पूरी खबर..
सोर्स: freepic

Mango Cultivation Tips: सही सिंचाई, खाद और रोग प्रबंधन से बाग होंगे फलों से लदे...

नई दिल्ली। आम को फलों का राजा कहा जाता है, लेकिन इसकी बंपर और गुणवत्तापूर्ण पैदावार तभी संभव है, जब सही समय पर वैज्ञानिक तरीके से देखभाल की जाए। बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार, जनवरी का महीना आम की खेती के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी समय आम का पेड़ यह तय करता है कि आगे चलकर उसमें बौर (फूल) आएंगे या केवल पत्तियों की बढ़वार होगी। यदि इस महीने सिंचाई, खाद या दवाओं में जरा-सी भी लापरवाही हुई, तो पूरी फसल प्रभावित हो सकती है और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

क्यों जनवरी आम की खेती के लिए सबसे अहम महीना है?

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जनवरी में आम का पेड़ “संक्रमण अवस्था” में होता है। इस दौरान पेड़ की आंतरिक जैविक प्रक्रिया यह तय करती है कि वह प्रजनन यानी फूल-फल की ओर जाएगा या केवल शाकीय वृद्धि करेगा।

अगर इस समय अधिक पानी, नाइट्रोजन युक्त खाद या अनावश्यक रसायनों का छिड़काव किया जाए, तो पेड़ फूल देने के बजाय नई पत्तियाँ निकालने लगता है। इसका सीधा असर आम की पैदावार और गुणवत्ता पर पड़ता है।

जनवरी में सिंचाई प्रबंधन कैसे करें?

जनवरी में ठंड अधिक होती है, ऐसे में आम के बागों में जरूरत से ज्यादा सिंचाई करना सबसे बड़ी गलती मानी जाती है।

इस महीने मिट्टी केवल हल्की नम रहनी चाहिए, गीली नहीं। अधिक सिंचाई करने पर बौर की जगह पत्तियों की बढ़वार बढ़ जाती है। जड़ों में हवा का संचार रुक जाता है, जिससे फूल और फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है।

आम के पेड़ों में बौर लाने के उपाय

अगर आम के पेड़ों में बौर नहीं आ रहे हैं, तो किसान घबराएं नहीं। आवश्यकता पड़ने पर पोटेशियम नाइट्रेट (KNO₃) का सीमित उपयोग किया जा सकता है।

1 प्रतिशत घोल (10 ग्राम प्रति लीटर पानी) बनाकर छिड़काव करें।

केवल परिपक्व और स्वस्थ पेड़ों पर ही इसका प्रयोग करें।कमजोर, छोटे या पहले से बौर वाले पेड़ों पर छिड़काव न करें। यह स्प्रे हर साल जरूरी नहीं होती, जरूरत पड़ने पर एक बार पर्याप्त मानी जाती है।

जनवरी में खाद प्रबंधन में बरतें ये सावधानियां

जनवरी के महीने में खाद प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण होता है।

इन खादों से बचें:

  • यूरिया
  • डीएपी
  • अन्य नाइट्रोजन युक्त रासायनिक खाद

ये खाद पत्तियों की बढ़वार बढ़ाती हैं, फूलों को नहीं।

इनका करें सीमित उपयोग:

  • सड़ी हुई गोबर खाद
  • वर्मीकम्पोस्ट

मिट्टी की नमी बनाए रखने के लिए हल्की मल्चिंग

सही खाद प्रबंधन से आम की फसल मजबूत होती है और बेहतर गुणवत्ता के फल मिलते हैं।

रोग और कीट प्रबंधन कैसे करें?

जनवरी में बिना जरूरत रूटीन कीटनाशक छिड़काव से बचना चाहिए।

यदि कीट दिखाई दें, तो 0.5 से 1 प्रतिशत नीम ऑयल का छिड़काव सुबह या शाम करें। फफूंद या रोग के लक्षण दिखने पर ही मैन्कोजेब या कार्बेंडाजिम का प्रयोग करें।अनावश्यक रसायनों का उपयोग फूल आने की प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा सकता है।

सही देखभाल से होगी बंपर कमाई...

अगर किसान जनवरी महीने में आम के पेड़ों की संतुलित देखभाल करते हैं, तो गर्मियों में बड़े, रसीले और बाजार में अच्छी कीमत पाने वाले आमों की मजबूत नींव रखी जा सकती है।

सिंचाई, खाद और दवाओं में संयम अपनाकर आम की खेती किसानों के लिए मुनाफे का सौदा साबित हो सकती है और उनकी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है।

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