Happy Seeder Soybean Farming से सोयाबीन की खेती को बढ़ावा, कम लागत में अधिक उत्पादन पर जोर

जबलपुर में कृषि विभाग व बोरलॉग इंस्टीट्यूट ने हैप्पी सीडर और सुपर सीडर तकनीक से सोयाबीन खेती को बढ़ावा दिया। पराली प्रबंधन से लागत घटी और उत्पादन बढ़ा।

Aug 1, 2025 - 07:52
Jan 24, 2026 - 08:41
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Happy Seeder Soybean Farming से सोयाबीन की खेती को बढ़ावा, कम लागत में अधिक उत्पादन पर जोर

जबलपुर, अचल वार्ता। किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन का लाभ दिलाने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा लगातार आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी क्रम में कृषि विभाग एवं बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया, जबलपुर के संयुक्त तत्वावधान में सोयाबीन की खेती में हैप्पी सीडर और सुपर सीडर जैसी उन्नत तकनीकों का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।

  इस अभियान के तहत 18 जुलाई को कृषि विभाग के अधिकारी जबलपुर विकासखंड के ढाना और सालीवाड़ा गांव पहुंचे। अधिकारियों एवं कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के खेतों में सोयाबीन फसल का निरीक्षण किया और हैप्पी सीडर एवं सुपर सीडर से बुआई के लाभों की विस्तृत जानकारी दी।

  किसान शैलेन्द्र कुमार जैन और कृष्ण कुमार गौड़ के खेतों में कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में पराली प्रबंधन के साथ सोयाबीन की उन्नत किस्म जेएस-208 की बुआई की गई थी। वर्तमान में फसल अच्छी बढ़वार अवस्था में है। किसानों ने बताया कि हैप्पी सीडर और सुपर सीडर से बुआई करने पर खेत में मौजूद नरवाई मल्च का कार्य कर रही है, जो बारिश के पानी से धीरे-धीरे सड़कर जैविक खाद में परिवर्तित हो जाती है।

  कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार इस तकनीक से खेत की तैयारी में लगने वाली लागत, समय और एक सिंचाई की आवश्यकता में कमी आई है। इसके साथ ही मिट्टी की नमी बनी रहती है, जिससे फसल की बढ़वार बेहतर होती है।

   अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष ग्राम मंगेला में करीब 82 एकड़ क्षेत्रफल में सोयाबीन की बुआई हैप्पी सीडर एवं सुपर सीडर के माध्यम से की गई है। उन्होंने किसानों से अपील की कि नरवाई को जलाने के बजाय सीधे इन यंत्रों से बुआई करें। इससे फसल 8 से 10 दिन पहले पककर तैयार हो जाती है और पकने की अवस्था में वर्षा होने पर फसल सुखाने के लिए खरपतवार नाशक दवाओं का उपयोग नहीं करना पड़ता।

  बोरलॉग इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने किसानों को शून्य जुताई तकनीक, फसल अवशेष प्रबंधन और खरपतवार नियंत्रण के आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी। इस अवसर पर कृषि वैज्ञानिक डॉ. पंकज कुमार, राहुल मौर्य, कृषि विस्तार अधिकारी पुरुषोत्तम प्रजापति एवं सोनम जैन उपस्थित रहे।

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