मत्स्य योजना में आजमाई किस्मत, आज कमा रहे लाखों रुपए

भोपाल की लवली गुप्ता और जलील खान ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का लाभ उठाकर मत्स्य पालन और फिशरीज इकाई से लाखों रुपए कमाए। जानिए उनकी प्रेरणादायक कहानी।

Aug 4, 2025 - 18:19
Jan 24, 2026 - 10:02
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मत्स्य योजना में आजमाई किस्मत, आज कमा रहे लाखों रुपए
  • मत्स्य योजना में आजमाई किस्मत, भोपाल के किसानों और उद्यमियों ने कमाए लाखों रुपए

"प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत लवली गुप्ता और जलील खान ने मत्स्य पालन से बनाई आर्थिक सफलता और ग्रामीण रोजगार की मिसाल। " 

लवली गुप्ता ने मत्स्य पालन से बनाई पहचान

भोपाल की रहने वाली लवली गुप्ता, जो पेशे से फार्मासिस्ट थीं, को पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण नौकरी छोड़नी पड़ी। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और मत्स्य पालन में व्यवसाय करने का निर्णय लिया।

लवली ने पीएम मत्स्य संपदा योजना का लाभ उठाया और सब्सिडी लेकर रंगीन मछलियों की एक यूनिट स्थापित की। उनके पति का पूरा सहयोग मिलने के बाद उन्होंने भोपाल और आसपास के जिलों में रंगीन मछलियों की बिक्री और एक्वेरियम लगाने का काम शुरू किया।

आज उनकी इकाई से उन्हें लगभग 1 लाख रुपये प्रति माह की स्थिर आय हो रही है। लवली ने मत्स्य विभाग, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का धन्यवाद जताया और योजना के योगदान को अपनी सफलता का मूल बताया।

जलील खान ने प्रमोशनल फिशरीज इकाई से कमाई

भोपाल के ईटखेड़ी गांव के जलील मोहम्मद खान ने 2022-23 में अपनी जमीन पर प्रमोशन ऑफ़ रेक्रीऐशनल फिशरीज इकाई स्थापित की। यह इकाई न केवल मछली उत्पादन करती है, बल्कि मनोरंजन और पर्यटन गतिविधियों का भी केंद्र है।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत जलील ने आवेदन किया और जिला समिति से अनुमोदन मिलने के बाद इकाई पर 50 लाख रुपये खर्च किए, जिसमें से 20 लाख रुपये की अनुदान राशि मिली।

निर्मित इकाई में लोगों की रुचि बढ़ी और पिछले एक साल में औसतन 60,000 रुपये प्रति माह की आय प्राप्त हुई। साथ ही लगभग 12 मीट्रिक टन पंगेशियस मछली का उत्पादन कर उसे बेचने से 8 लाख रुपये की अतिरिक्त आय भी हुई।

इस प्रकार, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता बनी, बल्कि ग्रामीण विकास और स्थानीय रोजगार सृजन का भी सफल उदाहरण स्थापित हुआ।

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